#MeToo दुःखद सत्य

विनीता नंदा का अलोक नाथ पर लगाया आरोप सच ही लगता है, क्योंकि उनकी बताई सारी घटनाओं का तारतम्य लोगों को याद भी है. नवनीत निशान ने भी समय समय पर इस घटना की तरफ इशारा किया था. इस तरह की घटनाएं सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण हैं. विनीता नंदा ने सचमुच बड़ी बहादुरी का काम किया है इसको सामने लाकर. सब कुछ पढ़ कर क्रोध, दुःख, क्षोभ एकसाथ होते हैं. किसी को ये हक़ नहीं है, और इसके लिए दोषी वे सब व्यक्ति भी हैं, जिन्होंने कहीं न कहीं सक्रीय या चुप रह कर आलोकनाथ का साथ दिया.आलोकनाथ को इसके लिए जो सजा मिले वो कम है. लेकिन इसमें कुछ बातें और भी हैं जिनको हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. स्त्रियों को एक ईश्वरप्रदत्त क्षमता होती है, व्यक्ति के इरादों को भांपने की. एक स्त्री होने के नाते मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि ऐसा कोई ख़तरा होते ही हमारी छठी इन्द्रिय हमें तुरंत सावधान करती हैं. जहां कहीं धोखे से, से अबोध बच्चियों के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं, वहा कुछ भी सावधानी की बात करना निरर्थक है, वहाँ तो जैसे लाचार मृग शावक पर हिंसक भेड़िआ हमला करता है तो बेचारा मृग जान कर भी कुछ कर नहीं पता. लेकिन विनीता नंदा जैसी सक्षम और समझदार बहनों से मैंने कहना चाहूंगी, क्यों नवनीत निशान के साथ व्यवहार को जानते हुए भी अलोक नाथ आपके मित्रों की सूची में था? क्यों आलोकनाथ के व्यक्तित्त्व , चरित्र और उसके इरादों को जानते हुए उसके घर देर पार्टी में जाना ज़रूरी था, जब कि उसकी पत्नी भी वहाँ नहीं थी. क्यों वहाँ शराब पी कर सूध बुध खोना जरूरी था? क्यों आप की मित्र मंडली में एक भी ऐसा शालीन पुरुष या स्त्री नहीं था जो आपका साथ देते? क्यों सब कुछ जानते हुए दोबारा स्वयं को उसे सौंपना ज़रूरी था? यह सब मैं स्लट शेमिंग के लिए नहीं कह रही हूँ. मैं मानती हूँ कि ये सब भी एक स्त्री की स्वतंत्र इच्छा या फ्री विल का हिस्सा होना चाहिए , नैतिकता और यौन सम्बन्घों को लेकर उसकी मर्ज़ी सर्वोपरि होनी चाहिए. लेकिन अगर ऐसी कोई घटना आपको वर्षों अवसाद में डाल सकती है तो उस को टालना ही बेहतर है
.विनीता नंदा के मसले पर विचार करके बहुत से सबक लिए जा सकते हैं. तारा के सेट पर बहुत सी महिला कर्म थीं, लेकिन किसी ने भी नवनीत निशान के साथ हो रहे व्यवहार के विरुद्ध आवाज़ नहीं उठायी. हर एक ने अपने व्यक्तिगत संबंधों, लाभ और व्यावसायिक हितों को महत्त्व दिया. ऐसे में ये अपेक्षा करना कि चैनल के मालिक अपने व्यावसायिक हितों को नज़रअंदाज़ करके विनीता का साथ देंगे व्यर्थ ही है.
मेरा अपनी सभी बहनों बच्चियों से अनुरोध है,अपनी छठी इन्द्रिय पर ध्यान दो, मुसीबत को टालना उसमे पड़ कर आहत होने से कहीं अच्छा है. सच है कि एक आदर्श समाज वही होता है जहाँ सभी स्वच्छंदता से जी सकें, कोई किसी का शोषण ना करता हो, हर कोई सुरक्षित हो. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा है नहीं. थोड़ी सी सावधानी काफी हद तक #meToo क्षणों को टाल सकती है. अगर ईश्वर ना करे आपके आसपास ऐसा कुछ हो ही जाए, तो मजबूती से पीड़िता के साथ खड़ी हों, वो गलती ना करें, जो विनीता नंदा ने की थी और जो दूसरों ने विनीता नंदा के साथ करी थी. अगर स्त्रियां स्वयं अपने लिए ना खड़ी होंगी तो पुरुष कभी नहीं होंगे.

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